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चल एक ओर बाझी खेलते है
जिसमे हरकदम पे तु आगे ओर मे पीछे हु

आज मेरे पथ मे कांटे बिछे हुये थे
कांटोने अपना ओर पराये का भेद बता दिया

आज आंखो का पानी भी सुख गया
उसकी याद तो आती है
मगर आंखो से बारिश नही होती है
एक गरुर जलकता है

गलत रास्ते पे चल के लोग अपनी मंझील केसे पाते होगे??
वहा से मीली सफलता केसे हझम होती होगी??

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