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आज तक मे ये समज ही नही पाई अपना ओर पराया कोन है?
पराया कभी अपना नही होता ओर अपना कभी साथ नही देता!!!

बहोत अल्फाझ है
अगर कुछ लिखना चाहो
मगर ये सब चार दिन
फिर ”महिला दिन”
होता है
ये कोन याद रखता है

ठोकर ओर पीठ पीछेवार अपनेही करते है
दिव्या, पराये तो घाव देते है दर्द नही…

थक तो मे भी गई हु
मगर सासे अभी तक साथ दे रही है
लगता है मंझील तक पहोचा कर रहेगी
वरना दिलने साथ छोड दिया होता

रास्ते खतम नही होते है
ईनसान थक जाता है
किस्मत वही ले जाती है
जहा हमारा भाग्य लिखा होता है

#DakshaSetaKaapadiyaa

पेरो के नीचे जमीन होती है
सीर के उपर आकाश होता है
हे खुदा!!!
फिरभी ईनसान अपने आपको
अकेला कयु महसुस करता है

#DakshaSetaKaapadiyaa

याद तो हर कोई आता है
मगर हर एक खास पल मे याद
आये वो प्यार है

मेरी जिंदगी के रास्ते उस वक्त से ख्तम हो गये थे
जिस वक्त मेने उसका साथ छोड दिया था

बहोत कुछ सिखा देती है जिंदगी
जब वक्त किसीका हो जाता है
ओर हमारे हाथो मे किस्मत थम जाती है

गम उसे होगा, मे क्यु अपने दिल को परेशान करु??
मेने उसे छोडा है उसने नही

अपने प्यार को तब तक मुहाब्बत करो जब तक वो तुम्हे अमुल्य समजे
जब वो किंम्मत लगादे उसे छोड दो
क्युकि किम्मत वस्तु कि होती है ईनसान की नही

आज बाझार मे नई चीझ आई है
सोचो वो कया होगी ?
हीरा मोती
नही नही

प्यार
आज कल प्यार बिक रहा है

दोस्त
तुम्हारी ओर मेरी डायरी अलग अलग है
पन्ने शब्द ओर शाही अलग है
मगर दोनो के अर्थ एक है
‘महोब्बत’

#DakshaSetaKaapadiyaa

वो लोग बेहद खूशनसीब होते है
जिनके रास्ते मे हम आते है

#DakshaSetaKaapadiyaa

मेरा ईकवार खालि गया तो एसा मत समजना बाझी आप जीत गये

गेम अभी अधूरी है ओर पासे मेरी ओर ईशारा करते है

ए दोस्त तु मुजसे अब शेर शायरी मत करवा वरना मे अपना दिल खोल दुंगी

मेरे दुश्मन भी खुश होंगे अब आई है

‘लपेट’ मे

#DakshaSetaLapadiyaaa

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