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ए दोस्त तु मुजे मत समजा दोस्ती कया है

मेने अपनी दोस्ती निभाने के लिये

नदी को छोडकर समुद्र के पास चलि गई

फिर पता चला

साला  कुछ तो गलत हुवा है

बुरा उसे नही कहते जो मुह पर केहदे
बुरा उसे केहते है जो दिल पर वार करदे

मुजसे कोई शरत मत लगाओ तुम कभी जीत नही पाओगे
मगर ईतना याद रखना हम कभी अपनो के सामने महाभारत नही खेलते

निंद भले ही आपको अपके हिसाब से आये
मगर हम आपके लिये सपना चुनते है आप नही

निंद भले ही आपको हमारी याद से न आये
मगर हम खुद आपके लिये सपना चुनते है आप नही

जनाब हम कहा बोलते है
चुप तो है
हम नही हमारी चुपकीदी आपको
मारडालेगी

#DakshasetaKapadiyaaa

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